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Showing posts from August, 2018

नारद कथा

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नारद मुनि को जब ब्रह्मा जी ने विवाह करने के लिए कहा तो उन्होंने विवाह करने से मना कर दिया और कहा आजीवन ब्रह्मचारी रहूंगा। ब्रह्मा जी इस बात से काफी नाराज हुअ और नारद मुनि को शाप भी दे दिया। ‘‘तुमने मेरी आज्ञा नहीं मानी, इसलिये तुम्हारा समस्त ज्ञान नष्ट हो जायेगा और तुम गन्धर्व योनी को प्राप्त कर कामिनीयों के वशीभूत हो जाओगे।’’ इसलिए नारद जी पहले गंदर्भ माने जाते हैं। नारद विवाह नहीं करना चाहते थे लेकिन ब्रह्मा के श्राप के कारण अब उन्हें कई स्त्रियों के साथ रहने का दंड मिल चुका था। इससे नारद दुःखी हुए। नारदजी ने कहा आपका श्राप स्वीकार है लेकिन एक आशीर्वाद दीजिए कि जिस-जिस योनि में मेरा जन्म हो, भगवान कि भक्ति मुझे कभी न छोड़े एवं मुझे पूर्व जन्मों का स्मरण रहे। दो योनियों में जन्म लेने के बाद भगवान की भक्ति के प्रभाव से नारद परब्रह्मज्ञानी हो गये।

नारद पुराण

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नारद पुराण अठारह महापुराणों में ‘ नारद पुराण' (Narada Puran)  या 'नारदीय पुराण' एक वैष्णव पुराण है। मान्यता है कि इसे देवर्षि नारद ने स्वयं अपने मुख से बोला था। इस पुराण में पच्चीस हजार श्लोक हैं, जो महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित हैं। नारद पुराण विष्णु भक्ति को समर्पित है। इस पुराण में विभिन्न पुण्य और पापों का वर्णन किया गया है। नारद पुराण में ब्रह्मचर्य व वर्ण के आधार पर कर्मों का विभाजन किया गया है। साथ ही इसमें समस्त पुराणों की तालिका सूची भी दी गई है। लेकिन जो चीज नारदपुराण को सबसे अहम बनाती है वह है इसमें वर्णित विभिन्न गणितीय समीकरण और सटीक वास्तु नियम। इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जाता है। नारद पुराण के भाग (Parts of Narad Puran) नारद पुराण सम्पूर्ण रूप से विष्णु भक्ति, ‘अतिथि देवो भव’ (अतिथि देवता का स्वरूप होता है) व ब्रह्मचर्य को समर्पित है। नारद पुराण दो भागों में विभाजित है, जो निम्न हैं: · पूर्व भाग:  नारद पुराण के पूर्व भाग में एक सौ पच्चीस अध्याय हैं, जिनमें ज्ञान के विभिन्न स्तर का विस्तारपूर्वक वर्णन के साथ धार्मिक गाथाएं, गु...

शिव पुराण के लाभ और उसका महत्व

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शिव पुराण क्या है? 'शिव पुराण' का सम्बन्ध शैव मत से है। शिव पुराण में भगवान शंकर के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। शिवमहापुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती के बारे में और उनकी गाथा का विवरण पूर्ण रूप से दिया गया है। 2 / 11 शिव पुराण में शिव की महिमा शिवपुराण में शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन और भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान है। 3 / 11 शिव पुराण सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण शिव - जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं, सर्वोच्च सत्ता है, विश्व चेतना हैं और ब्रह्माण्डीय अस्तित्व के आधार हैं। सभी पुराणों में शिव पुराण को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होने का दर्जा प्राप्त है। इसमें भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है। 4 / 11 शिव पुराण में खास इस पुराण में प्रमुख रूप से ...

नारद जी के जन्म की कथा

नारद जी की जन्म कथा नारद  जन्म कथा देवर्षि नारद पहले गन्धर्व थे। एक बार ब्रह्मा जी की सभा में सभी देवता और गन्धर्व भगवन्नाम का संकीर्तन करने के लिए आए। नारद जी भी अपनी स्त्रियों के साथ उस सभा में गए। भगवान के संकीर्तन में विनोद करते हुए देखकर ब्रह्मा जी ने इन्हें शाप दे दिया। जन्म लेने के बाद ही इनके पिता की मृत्यु हो गई। इनकी माता दासी का कार्य करके इनका भरण-पोषण करने लगीं। एक दिन गांव में कुछ महात्मा आए और चातुर्मास्य बिताने के लिए वहीं ठहर गए। नारद जी बचपन से ही अत्यंत सुशील थे। वह खेलकूद छोड़ कर उन साधुओं के पास ही बैठे रहते थे और उनकी छोटी-से-छोटी सेवा भी बड़े मन से करते थे। संत-सभा में जब भगवत्कथा होती थी तो यह तन्मय होकर सुना करते थे। संत लोग इन्हें अपना बचा हुआ भोजन खाने के लिए दे देते थे। साधुसेवा और सत्संग अमोघ फल प्रदान करने वाला होता है। उसके प्रभाव से नारद जी का हृदय पवित्र हो गया और इनके समस्त पाप धुल गए। जाते समय महात्माओं ने प्रसन्न होकर इन्हें भगवन्नाम का जप एवं भगवान के स्वरूप के ध्यान का उपदेश दिया। एक दिन सांप के काटने से उनकी माता जी भी...

Sawan Ke mahine me Bhagwan Shiv Ki Pooja

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हम लोग सावन में  यह सोचते है कि भगवान शिव जी का अभिषेक कैसे करे अगर आप को नहीं पता तो इसे जरूर देखें आप भगवान शिव के   मन्दिर में  जाकर भगवान शिव के सामने एक आसन पर बैठ कर अपने आप को पवित्र कर ले और शिव जी को क्रम से सारी सामग्री चढ़ाए पहले स्नान कराएं फिर चंदन फूल चावल इत्यादि उनको सारी सामग्री चढ़ाए फिर हाथ मे जल ले और शिव जी के ऊपर कुछ देर तक छोड़े और जब तक छोड़े ओम् नमः शिवाय मंत्र का जप करें या फिर महा मृत्युंजय मंत्र का जप करेंगे फिर अंत में आरती और प्रार्थना कर ले 🚩🚩ओम् नमः शिवाय 🚩🚩